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इंडियन रेलवे फाइनेंस कॉर्पोरेशन लिमिटेड

            आई.आर.एफ.सी.  रेल मंत्रालय की एक  समर्पित  वित्तीय भुजा है । इसका एक मात्र उद्देश्य भारतीय रेल के योजना परिव्यय को अंशतः वितपोषित करने के लिए बाजार से धनराशि जुटाना है । इस प्रकार उपलब्ध कराई गई राशि का उपभोग भारतीय रेल के लिए चल-स्टाक परिसंपतियों की खरीद तथा अन्य विकासात्मक आवशकताएं पूरी करने के लिए किया जाता है। 

 

             आई.आर.एफ.सी का ऋण कार्यक्रम रेल मंत्रालय द्वारा प्रक्षेपित आवश्यकताओं पर आधारित होता है।  कंपनी ने वर्षानुवर्ष ऋणों का  लक्ष्य करयोग्य तथा करमुक्त बाँडों , बैंको/वित्तीय संस्थाओं से आवधिक ऋणों तथा विदेशी ऋणों के माध्यम से सफलतापूर्वक पूरा किया है। आई.आर.एफ.सी.ऋण पोर्टफोलियो का विविधीकरण करने तथा लागत को न्यूनतम करने के लिये नवीन वित्तीय प्रतिभूतियों का उपयोग भी करती है। रेलों पर अवसंरचना निर्माण में इसका   योगदान बहुत ही महत्वपूर्ण है। आई.आर.एफ.सी. से  वित्तपोषण सहायता से 31 मार्च, 2010 तक भारतीय रेल के परिसंपत्ति बेड़े में   60,163 करोड़ रुपए की चल स्टॉक परिसंपत्तियां - रेल इंजन, सवारी डिब्बे तथा मालडिब्बे शामिल किए गए हैं। आई.आर.एफ.सी. द्वारा किए गए  वित्तपोषण से रेलों पर प्रौद्योगिकी  का विस्तार करने  में सहायता मिली है तथा रेल मंत्रालय तीव्रगति/शताब्दी गाड़ियों में उपयोग के लिए जनरल मोटर्स (यू.एस.ए.) से प्रौद्योगिकी के हस्तांतरण सहित नई पीढ़ी के रेल इंजन तथा उच्च गति/शताब्दी गाड़ियों के लिये जर्मनी से नई पीढ़ी के सवारी डिब्बे खरीदने में समर्थ हुआ है।