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Last Updated On: 20-08-2013


कंपनी प्रोफाइल

आई.आर.एफ.सी.  रेल मंत्रालय की एक  समर्पित  वित्तीय भुजा है । इसका एक मात्र उद्देश्य भारतीय रेल के योजना परिव्यय को अंशतः वितपोषित करने के लिए बाजार से धनराशि जुटाना है । इस प्रकार उपलब्ध कराई गई राशि का उपभोग भारतीय रेल के लिए चल-स्टाक परिसंपतियों की खरीद तथा अन्य विकासात्मक आवशकताएं पूरी करने के लिए किया जाता है।

आई.आर.एफ.सी का ऋण कार्यक्रम रेल मंत्रालय द्वारा प्रक्षेपित आवश्यकताओं पर आधारित होता है।  कंपनी ने वर्षानुवर्ष ऋणों का  लक्ष्य करयोग्य तथा करमुक्त बाँडों , बैंको/वित्तीय संस्थाओं से आवधिक ऋणों तथा विदेशी ऋणों के माध्यम से सफलतापूर्वक पूरा किया है। आई.आर.एफ.सी.ऋण पोर्टफोलियो का विविधीकरण करने तथा लागत को न्यूनतम करने के लिये नवीन वित्तीय प्रतिभूतियों का उपयोग भी करती है। रेलों पर अवसंरचना निर्माण में इसका   योगदान बहुत ही महत्वपूर्ण है। आई.आर.एफ.सी. से  वित्तपोषण सहायता से 31 मार्च, 2013 तक भारतीय रेल के परिसंपत्ति बेड़े में   97,482 करोड़ रुपए की चल स्टॉक परिसंपत्तियां - रेल इंजन, सवारी डिब्बे तथा मालडिब्बे शामिल किए गए हैं। आई.आर.एफ.सी. द्वारा किए गए  वित्तपोषण से रेलों पर प्रौद्योगिकी  का विस्तार करने  में सहायता मिली है तथा रेल मंत्रालय तीव्रगति/शताब्दी गाड़ियों में उपयोग के लिए जनरल मोटर्स (यू.एस.ए.) से प्रौद्योगिकी के हस्तांतरण सहित नई पीढ़ी के रेल इंजन तथा उच्च गति/शताब्दी गाड़ियों के लिये जर्मनी से नई पीढ़ी के सवारी डिब्बे खरीदने में समर्थ हुआ है।

 

अत्यधिक उत्पादक उच्च क्षमता वाले माल डिब्बों तथा उच्च अश्वशक्ति के  रेल इंजनों के वित्तपोषण में आई.आर.एफ.सी. के हिस्से को बहुत ही महत्व है।  आई.आर.एफ.सी. के वित्तपोषण से उच्च क्षमता वाली तथा दक्ष परिसंपत्तियों की खरीद  के फलस्वरूप  वर्षों से वर्धमान यातायात आउट-पुट  तथा राजस्व  वृद्धि में काफी सहायता  मिली है। भारतीय रेल-तंत्र पर परिचालित लगभग 50 प्रतिशत राजस्व अर्जक चल-स्टॉक परिसंपत्तियां आई.आर.एफ.सी. द्वारा वित्तपोषित  हैं।

 

आई.आर.एफ.सी. ने अपनी अपनी स्थापना के समय से लगातार लाभ अर्जित किया है तथा 2009-10  तक 500 करोड़ रूपये की प्रदत्त पूंजी पर 1468 करोड़ रूपये के लाभांश का भुगतान किया है , प्रदत्त पूंजी  को 2 जून 2009 को बढ़ाकर 800 करोड़ रूपये कर दिया गया ।  वर्ष 2005-06, 2006-07, 2007-08 , 2008-09 तथा2009-10  के लिए लाभांश का भुगतान क्रमशः 150 करोड़, 160 करोड़,  100 करोड़,100 करोड़ तथा 100 करोड़  है जो रेलवे के सार्वजनिक क्षेत्र के किसी उपक्रम द्वारा अब तक दी गई सर्वाधिक है। 31 मार्च,2010 को विद्यमान स्थिति के अनुसार आई.आर.एफ.सी का नेटवर्थ 3405.48 करोड़ रूपये है।  

आई.आर.एफ.सी. द्वारा वित्तपोषित चल स्टॉक परिसंपत्तियाँ रेल मंत्रालय को पट्टे पर दी जाती हैं जो कंपनी को हर छमाही पट्टा किराये का भुगतान करता है। मंत्रालय ने 17,770.62 करोड़ रुपए मूल्य की परिसंपत्तियों के संबंध में पहले ही  भुगतान कर दिया है। कंपनी मंत्रालय की लागत कम करने के लिए सतत् प्रयास भी करती हे। इसके गतिशील एवं सक्रिय नेतृत्व  एवं दिशानिर्देश के अन्तर्गत आई.आर.एफ.सी.  रेल मंत्रालय की वर्धमान ऋणों की लागत सफलतापूर्वक कम   कराई है जो 1996-97 के 14.97 प्रतिशत वार्षिक से घटकर 2009-10 में  8.21  प्रतिशत  वार्षिक  हो गई।

 

लोक उद्यम विभाग द्वारा कंपनी के कार्यनिष्पादन को लगातार ग्यारहवें  वर्ष उत्कृष्ट रेटिंग प्रदान की है। आई.आर.एफ.सी. की  लगातार चार वर्षों से दस  शीर्ष  सरकारी उपक्रमों में रेंकिंग होना विशेष रुप से उल्लेखिनीय है। वर्ष 2001-02, 2002-03 तथा 2003-04 के लिए कंपनी ने क्रमशः  भारत के राष्ट्रपति,   भारत के प्रधानमंत्री तथा भारत के उप राष्ट्रपति से पुरस्कार प्राप्त  किए हैं। कंपनी ने वर्ष 2005-06, 2006-07, 2007-08 तथा 2009-10  के लिए परफैक्ट स्कोर 1 हासिल किया है।

 

            क्रेडिट रेटिंग - घरेलू - वित्त वर्ष 2009-10 के दौरान आई.आर.एफ.सी. को घरेलू ऋण के लिए  क्रिसिल से एएए स्टेबल, इकरा से एलएएए, केयर से  एएए  रेटिंग मिली हैँ। 

विदेशी ऋण के लिए इसे फिच तथा एस. एण्ड पी. से "बी बी बी-स्टेबल" ,    मूडी से "बीएए३ स्टेबल "  रेटिंग मिली हैं ।  इसके अलावा कंपनी ने जापानी क्रेडिट रेटिंग एजेंसी से मार्च 2007 के समुराय बांड निर्गम हेतु मिली  "बी बी बी+स्टेबल "   रेटिंग  प्राप्त की है।

कंपनी का भावी निर्देशन योजनाएं - इसके मौजूदा कारोबार पर ध्यान केन्द्रित करना रेल मंत्रालय के लिए निम्न-लागत वित्तपोषण स्त्रोत के रूप में अपनी स्थिति और मजबूत करना ।

चल-स्टाक आदि के क्षेत्रों में नई प्रौद्योगिकियों के समावेश  के लिए रेल मंत्रालय हेतु वित्तपोषण सहायता उपलब्ध कराकर रेल मंत्रालय की एक मात्र बाजार ऋण भुजा के रूप में अपनी विशिष्टता स्थापित करना ।

चुनिंदा आधार पर वित्तीय दृष्टि से अर्थक्षम तथा तथा लाभप्रद रेल परियोजनाओं के वित्तपोथषण के माध्यम से अपने कार्यों का विविधीकरण करना जिनमें पत्तनों को जोड़ना अथवा विशिष्ट उद्योग आधारित नई लाइनें आमान परिवर्तन योजनाएं शामिल हैं।

वित्तीय संरचना में सलाहकार सेवाओं में भाग लेना बहुउदेशीय एजेंसियों यथा ए डी बी तथा विश्व बैंक से ऋणों के माध्यम से ऋण जुटाना ताकि निधियों के स्त्रोतों का विविधीकरण किया जा सके तथा अति अनुकुलतम लागत पर स्त्रोतों के वांछित पुल में प्रवेश सुनिश्चत किया जा सके।